केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि कोविड पॉजिटिव आने के 30 दिनों के भीतर अगर किसी ने आत्महत्या कर ली हो तो उसे कोविड डेथ के तहत मानते हुए उसके परिजन 50 हजार रुपये मुआवजे का हकदार होगा।
13 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह कोविड डेथ सर्टिफिकेट को लेकर जारी गाइडलाइंस में उस तथ्य पर विचार करे जिसमें कोविड पीड़ित के आत्महत्या करने के मामले को कोविड डेथ की श्रेणी में नहीं रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस मामले में दोबारा अपने फैसले पर विचार करे।
डेथ सर्टिफिकेट में लिखा जाएगा मौत का कारण
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा था कि कोविड से संबंधित मौत के मामले में डेथ सर्टिफिकेट जारी करने के संबंध आईसीएमआर और हेल्थ मिनिस्ट्री ने गाइडलाइंस जारी किया है। मृतक के परिजनों को मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किया जाए और मौत का कारण लिखा जाएगा। कोविड डेथ सर्टिफिकेट जारी करने को आसान बनाने के लिए गाइडलाइंस जारी किया गया है और उसमें कहा गया है कि कोविड पीड़ित का अगर जहर से मौत हो जाए या फिर एक्सिडेंट से मौत हो जाए या फिर आत्महत्या से मौत हो जाए तो उसमें कोविड डेथ नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में कोविड पेशेंट के आत्महत्या मामले को कोविड डेथ से बाहर रखना स्वीकार्य नहीं लगता है ऐसे में सरकार इस पर विचार करे।
आत्महत्या मामले में दिया जाएगा मुआवजा
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा है कि अगर कोई शख्स कोविड से पीड़ित है और पॉजिटिव रिपोर्ट आई है और उसके 30 दिन के दौरान अगर उसने आत्महत्या कर ली हो तो कोविड डेथ के तहत उसके परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा है कि आईसीएमआर और हेल्थ मिनिस्ट्री के गाइडलाइंस के तहत जैसे ही कोविड का पता चलता है और उसके 30 दिनों के भीतर अगर वह शख्स आत्महत्या कर लेता है तो उसे कोविड डेथ माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट से केंद्र ने गुहार लगाई है कि इस मामले में वह उचित निर्देश जारी करे। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा है कि एनडीएमए ने कोविड डेथ के मामले में सर्टिफिकेट के आधार 50 हजार रुपये मुआवजा दिए जाने का निर्देश दिया है।